Sunday, 20 September 2015

डेमोक्रेसी

जिसे हम डेमोक्रेसी कहते हैं वह व्यवहार में बड़े-बड़े व्यापारियों और जमीनदारों का राज्य है और कुछ नहीं! चुनाव में वही बाजी ले जाता है जिसके पास रुपये हैं!
 रुपये के... जोर से उसके लिए सभी सुविधाएँ तैयार हो जाती हैं! बड़े-बड़े मौलवी, बड़े-बड़े लिखने और बोलने वाले जो अपनी जबान और कलम से पब्लिक को जिस तरफ चाहें फेर दें, सभी सोने के देवता के पैरों पर माथा रगड़ते हैं- मुंशी प्रेमचंद