Saturday, 17 September 2016

अम्बेडकर: समझौता परस्त

अम्बेडकर ताउम्र समझौतों रियायतों के जरिये हक लेने के पक्षधर रहे। अब अगर अंबेडकरवादी इस बात से सहमत नहीं हैं तो सुन लीजिए फिर।
अंबेडकर ने कौनसा जमीनी संघर्ष किया? कब सड़क पर उतरे? कब अन्याय के खिलाफ हथियार उठाए?
पूरी जिंदगी कांग्रेस को कोसने के बाद अंत में उसी के साथ समझौता करके संविधान सभा में गए। कभी अंग्रेजों से समझौता कभी गांधी से समझौता।
जब भगत सिंह और उनके साथी साइमन कमीशन के खिलाफ सड़कों पर थे तब अम्बेडकर साइमन के साथ भारत भ्रमण पर थे।
जब तेलंगाना के भूमिहीन दलित अपने हक के लिए लड़ रहे थे और भारत की सेना उन पर गोलियां चला रही थी, तब भी तत्कालीन विधि मंत्री अम्बेडकर आराम से मंत्री की कुर्सी पर बैठे थे।
अब अम्बेडकर आपके आराध्य हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि आलोचना या विवेचना से परे हैं। और बेहतर होगा कि मुझे सिखाने से पहले खुद अम्बेडकरवाद को जान लीजिए। यूँ ही भक्ति करने से सैद्धांतिक समझ नहीं बनती।