Wednesday, 11 May 2016

उत्तराखंड प्रकरण; कुछ भी नया नहीं!

उत्तराखंड प्रकरण, एक मामले में, छोटे स्तर पर ऐतिहसिक है! वैसे आजकल फैशन चल पड़ा है, किसी भी घटना को ऐतिहसिक घोषित करने का, जैसे आई पी एल में रन बनाने का, मोदी का विदेश जाने का, आदि!
उत्तराखंड में केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शाशन लगाया! दलील है विधान सभा के सदस्यों की खरीद फरक्त! यह कहीं से भी नया नहीं है, भारतीय प्रजातंत्र के इतिहास में! राज्यपाल ने केंद्र के ‘आदेश’ पर कार्यवाही की, यह भी कतई ऐतिहसिक नहीं था!
कोंग्रेस से टूटे विधायक अयोग्य घोषित किये गए विधान सभा के स्पीकर द्वारा, आरोप था दल बदल! सबकुछ पुराना ही चल रहा था! राज्यपाल ने पहले मुख्य मंत्री को बहुमत साबित करने को कहा, पर समय से पहले, केंद्र की चाटुकारिता करते हुए राष्ट्रपति शाशन के लिए ‘आवेदन’ दिया, जिसे केन्द्रीय सरकार ने स्वीकार और रातों रात राष्ट्रपति के पास भेजा, जिन्होंने ने पलक झपकाते ही सिफारिश स्वीकार कर लिया!
उत्तराखंड की अपदस्त सरकार वहां के उच्च न्यायलय पहुंची! और यहाँ कुछ अलग हुआ! माननीय न्याधीश ने राष्ट्रपति शाशन ख़ारिज कर दी और पुराने सरकार को बहाल किया और समय दी अपनी बहुमत साबित करने के लिए! यह थोडा भिन्न था, पर जहाँ तक भारत के प्रजातंत्र की बात है; कोई खास बल नहीं मिलाने वाला था, क्यूँ, आगे चर्चा करेंगे! न्यायाधीश का तबादला भी हो गया!
२२ अप्रैल को यह ‘घमासान’ उच्तम न्यायलय में पहुच चूका था और बहस के बाद न्यायलय ने अपने विवेक में उत्तराखंड आदेश पर स्थगन लगा दिया! मुख्यमंत्री अभी दुबारा पद संभाल भी नहीं सके थे की, पुनः बनबास लेना पड़ा! परजातंत्र या इसका मजाक या भुत?
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में ‘फ्लोर टेस्ट’ करवाने की बात की! केंद्र यानि भाजापा मान गया! इस बिच 09 मई को उत्तराखंड हाई कोर्ट का निर्देश आया, बागी विधायक टेस्ट में भाग नहीं ले सकते! कोंग्रेस को राहत! उसी समय सुप्रीम कोर्ट पहुँच गयी, 12 बजे बहस हुई और 4 बजे निर्णय, बागी विधायक हिस्सा नहीं ले सकते!
10 मई को फ्लोर टेस्ट हुआ! कोंग्रेस की सरकार बच गयी! 11 मई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, राष्ट्रपति शाशन हटेग, कोंग्रेस की सरकार बहाल होगी! पर अभी सी बी आई का खेल बाकि है, क्यूंकि राज्यपाल ने आदेश दे रखा है जाँच का, मुख्य मंत्री के खिलाफ, जो पकडे गए हैं स्टिंग ओपरेशन में, विधायकों के खरीद फरोक्त में!
कहानी मजेदार नहीं है! पहले भी इस तरह की घटनाएँ घट चुकी हैं! शर्म शार होने जैसी कोई बात नहीं होती आज कल! प्रजातंत्र की हत्या की दुहाई वही देते हैं जो यह काम करते हैं! कोंग्रेस भी पहले यह काम कर चुकी है!
पूंजीवाद में ऐसा होता है, कहना काफी नहीं है! लालच, मौका परस्ती, भ्रष्टाचार तो आम बातें हैं, पर जो कानून बनाता है, उसकी यह हालत तो यही दिखाता है की नरक है यहाँ!
इस व्यवस्था में सुधार की बात करना, देश के करोडो शोषित मजदुरों और किसानॉन के साथ घात करना है और ऊपर के उदाहरणों में जो पूंजी के चाटुकार हैं, उनके साथ मिलकर लुट के माल में बटवारा मांगने जैसा है!
पूंजीवादी उत्पादन बेरोजगारी, भ्रष्टाचार पैदा करता है! मूढ़ता और अन्धविश्वाश पैसा करता है, जहाँ गुरुत्वाकर्षण के तरंगो को खोज लिया गया है! गरीबी पैदा करता है, जहाँ खरबों का उत्पाद भंडारों में सड़ता है, क्यूंकि खरीददार नहीं हैं!
रास्ता एकमात्र है; समाजवाद! यानि, उत्पादन के साधनों पर सामाजिक कंट्रोल! जमीन और बाकि हर संसाधनों पर समाज का कंट्रोल! मानव का मानव द्वारा शोषण का खात्मा! वर्ग विहीन समाज की स्थापना! औरतों का उत्पीडन बंद! बाल मजदुरी एक झटके में ख़त्म!
समाजवादी क्रांति!

Saturday, 7 May 2016

भगवान को पैसा चढ़ाया तो मिलेगा दंड

Paresh L. Soni💰
भगवान को पैसा चढ़ाया तो मिलेगा दंड!💣गा दण्ड💡
नासा (NASA) ने भारत के देवी देवताओं और भगवानों पर रिसर्च की और पाया कि आजकल भगवानों की पालिसी में जबरदस्त बदलाव आया है।उन्हें दान दक्षिणा व चढ़ावे से सख्त घृणा हो गई है। उन्होंने महसूस किया कि दान की रकम का भंयकर दुरुपयोग हो रहा है, मंदिरों की रखरखाव में कोई पैसा खर्च नहीं हो रहा है, मंदिर गन्दे और घुटन भरे हैं।
💣 इस कारण से देवी देवता अपने भक्तों को ही दंडित कर रहे हैं। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-
🏊🏽 बद्रीनाथ - केदारनाथ में देवताओं ने हजारो भक्तों को बाढ़ के पानी में डुबो डुबो कर मारा। इसमें वे लोग बच गए जो मंदिर नहीं जा पाए थे।
🚑 एक मामले में माता पिता अपने एक मात्र लड़के के लिए दुआ मानने वेष्णों देवी गये और वहाँ सोने का हार चढ़ाया। कुछ दिनों में ही उनके लड़के की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
 एक परिवार शिरडी में 50,000/- रुपये चढ़ा कर घर लौटा तो उसके घर में पदावनति (reversion) का आर्डर पड़ा हुआ था।
👀 एक परिवार तिरुपति से सिर मुड़वा कर घर लौटा तो देखा कि उसके घर से करीब 6 लाख रुपये चोरी हो गए थे।
👥👥 रिसर्च में ऐसे लाखों उदाहरण पाये गये जहाँ देवताओं ने भक्तों को दान - चढ़ावा देने पर दण्ड दिया।
🔔 इसलिए सावधान हो जाएं यदि मंदिर जाये भी तो एक भी पैसा, सामान ना चढ़ायें नहीं तो दण्ड भुगतने के लिए तैयार रहें।
👪 दूसरी ओर देवी देवता मंदिर छोड़कर सामान्य आदमी के भेष में रहने लगे हैं जिसके उदाहरण निम्नलिखित हैं-
📘📒📓 एक अध्यापक ने अपनी नौकरानी की लड़कियों को पढ़ने के लिए मुफ्त किताबें दी और ट्यूशन भी दी तो उसके लड़के को मल्टीनेशनल कंपनी में बहुत अच्छी नौकरी मिल गई।
🙇🏻 एक व्यापारी ने ठंड से कांपते भिखारी को कम्बल दिया और घर बुला कर खाना खिलाया जिससे उसको व्यापार में तीन गुना लाभ मिला।
🌾🍀 एक धनी किसान ने अपने खेतों में काम करने वाले मजदूरों को सामान्य से दुगुनी मजदूरी दी तो उस साल उसका बहुत फायदा हुआ।
👪 इस प्रकार से देवी देवता आजकल गरीबों के रूप में प्रकट हो रहे हैं इसलिए गरीबों को दान दक्षिणा देने से ही फल मिल रहे हैं।
 मंदिर में पैसा चढ़ाना खतरनाक साबित हो रहा है। भगवान को पैसा चढ़ाने या पुजारी को देकर तत्काल वीआईपी दर्शन से भगवान आपकी सम्पत्ति नष्ट कर सकते हैं.
मंदिर में अपने धन बैभव के चढ़ावे का दिखावा न करें, 
वास्तविक जरूरत मंद को सहयोग देकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें.
जनहित में जारी....

जय भीम लाल सलाम!

रोहित वेमुला के आत्म हत्या के बाद, समाज में एक 'नयी' विचारधारा आई है! वामपंथियों और दलितों का सहयोग और एकता! जे एन यु प्रकरण में यह 'प्रयोग' दिखा! भाजपा की बेचैनी समझ में आती है!
वामपंथी शुरू से ही दलितों, अल्प संख्यकों के साथ हैं! पर हर बार देखा गया है, समर्थन में क्रन्तिकारी विचारधारा का ह्रास!
वाम यानि मजदुर वर्ग की पार्टी! पूंजीवाद को हटाकर समाजवाद लाने वाली पार्टी! निजी पूंजी पर आधारित उत्पादन का ध्वंस! रास्ता मजदुर वर्ग का अधिनायकत्व! वर्ग समाप्ति कर वर्ग विहीन समाज की स्थापना, किसी भी वर्ग का दुसरे वर्ग पर अधिनायकत्व की समाप्ति! मानव द्वारा मानव का शोषण ख़त्म!
स्वतंत्रता के बाद, खासकर स्टॅलिन के मृत्यु के बाद, भारत कम्युनिस्ट पार्टी ने संसदीय प्रजातंत्र को मजबूत करने का काम किया, चुनाव जितना मकसद बन गया! जो रास्ता था, वह लक्ष्य बन गया! धार्मिक, जाति शोषण का विरोध करते करते, उसका उपयोग चुनाव जितने में करने लगे! कोंग्रेस या कई भारी मौकापरस्त छेत्रिय दल भी प्यारे हो गए! अभी बंगाल का चुनाव उदहारण है!
जय भीम लाल सलाम आन्दोलन, आंबेडकर के उन मान्यताओं को लेकर चलता है, जो नारे के रूप में वाम के लिए भी प्रिय है! नेस्तनाबूद करने की बात करते हैं दलित नेता; जाति, धर्म और पूंजीवाद का! मायावती ने ज्यादा वक्त नहीं लिया वाम के 'इस चाल' को और व्यक्तव्य दिया, दलित आन्दोलन साम्यवाद के लिए नहीं हैं!
माना, वाम पंथियों के लक्ष्य मायावती या और कोई दलित नेता नहीं हैं, पर क्या दलित साम्यवादी क्रांति के लिए तैयार हैं?
आगे बढ़ने से पहले यह बताना आवश्यक होगा कि, दलितों का पूरी तरह से  सर्वहाराकरण हो चूका है! उनमे बहुत कम ही पूंजीपति या बहुत धनि हैं, पर उनके नेता बुर्जुआ वर्ग के चाकरी में व्यस्त हैं और एक बहुत ही सुविधा भरी जीवन जी रहे हैं! हाँ, दलित मजदूरों का सामाजिक और जातिय शोषण और प्रतारणा जारी है और पूंजीवाद के संकट में बढ़ता ही जा रहा है!
मजदुर वर्ग के नेत्रित्व में क्रांति! क्यूंकि वह समाज का सबसे अग्रणी वर्ग है और छमता है क्रांति करने का! वह समाज में भारी बहुमत में है, किसान स्वाभाविक रूप से उसके साथ में हैं! "मजदुर वर्ग के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, बल्कि जंजीर है!"
जय भीम लाल सलाम! यदि वाम दलितों के पास जाता है, क्यूंकि वह मजदुर हैं तो फिर बात अलग है, क्रांतिकारी कदम हो सकता है! पर दलितों के 'विचारधारा', जो आर्थिक मांग के साथ सामाजिक बराबरी की बात करता है, सत्ता में हिस्सा लेने की बात करता है और राजनितिक क्रांति को नजर अंदाज करता है, तो इतिहास गवाह है, वाम का ही छरण होगा!
अभी फासीवाद बढ़ रहा है! भारत में आर एस एस के नेत्रित्व में और दुनिया में बाकि जगहों में! फासीवाद का नंगा रूप युक्रेन, अमेरिका में दिख रहा है! आतंकवाद भी चरम है, जो पूंजीवादी साम्राज्यवाद का ही देन है!
ऐसे समय एक बृहद राष्ट्रिय संधि आवश्यक होगा! हर प्रगतिशील संगठन इसका हिस्सा हो सकता है! यह आन्दोलन एक महत्वपूर्ण सहयोग कर सकता है! आर एस एस का रवैया दलितों के प्रति जग जाहिर है!
फासीवाद, यानि पूंजीवाद का ही एक रूप, 2008 के बाद पूंजीपतियों के लिए आवश्यक हो गया! अमेरिका में बैंक घेरो, यूरोप के मजदूरों का भारी विरोध, अविकसित देशों और चीन में भी असर ने पूंजी के चाकरों और 'विद्वानों' को समझ में आया की अभी 'प्रजातान्त्रिक' तरीके सफल नहीं होंगे मजदुर वर्ग के विरोध को दबाने में! इसके पहले क्रांति आगे बढे, इसे तोड़ना होगा और धर्म, जाति, देश, व्यक्ति पूजा, आदि का भरपूर इस्तेमाल करना होगा! घटते मुनाफा और मुनाफा दर को बढ़ाना होगा!
आवश्यक है वाम नेत्रित्व को, की हर प्रगतिशील और क्रांतिकारी समूह को संगठित करें, मजदुर वर्ग के नेत्रित्व में  पूंजीवाद का विरोध करे और क्रांति की तैयारी  रखें, मौका कभी भी मिल सकता है! दलित पीड़ित हैं, पर सर्वहारा क्रांति से अलग लडाई केवल बुर्जुआ 'सुधार' का ही हिस्सा बन जायेगा और शोषण और गहन होगा!