सरकार के हर जुमले पर मध्यम वर्गीय मुर्ख ताली बजा रहे हैं, जैसे उनकी जेब में कुछ आने वाला हो! पता नहीं कुँए के मेढकों को कि उनका खुद का जेब खाली हो रहा है!
दुर्भाग्य मजदुर वर्ग का की उनके हित की बात करने वाले वामपंथी अवर्गीय लड़ाई लड़ रहे हैं, फासीवाद के विरुद्ध, बिलकुल वैसे ही जैसे की कोंग्रेस या आप लड़ रहे है, या जैसे भाजपा पहले लड़ता था!
मजदुर वर्ग की लड़ाई केवल आर्थिक हो ही नहीं सकता, इसे राजनितिक होना पड़ेगा, उसे अपनी सत्ता बनाना होगा! अभी के शोसकों को और उनके राज्य को ध्वस्त करना होगा!
एक समाज जो जुमलों, धर्म, जाति, व्यक्तिवाद पर नहीं, बल्कि समाज के हर सदस्य के लिए हो, जहाँ कोई शासक या शोषित नहीं हो! वर्ग विहीन समाज, जो संभव है और होगा!
दुर्भाग्य मजदुर वर्ग का की उनके हित की बात करने वाले वामपंथी अवर्गीय लड़ाई लड़ रहे हैं, फासीवाद के विरुद्ध, बिलकुल वैसे ही जैसे की कोंग्रेस या आप लड़ रहे है, या जैसे भाजपा पहले लड़ता था!
मजदुर वर्ग की लड़ाई केवल आर्थिक हो ही नहीं सकता, इसे राजनितिक होना पड़ेगा, उसे अपनी सत्ता बनाना होगा! अभी के शोसकों को और उनके राज्य को ध्वस्त करना होगा!
एक समाज जो जुमलों, धर्म, जाति, व्यक्तिवाद पर नहीं, बल्कि समाज के हर सदस्य के लिए हो, जहाँ कोई शासक या शोषित नहीं हो! वर्ग विहीन समाज, जो संभव है और होगा!
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