रोहतक आइसिन कांड :कंपनी की मनमानी नहीं मानी तो मजदूरों को भेजा जेल
http://www.janchowk.com/pahlapanna/rohatak-aisin-company-%20laborer-dispute/347
“जापानी कंपनी के पक्ष में सरकार और सारा प्रशासन सक्रिय हैं और अपने ही देश के मज़दूरों के साथ कोई सहानुभूति नहीं। श्रमिक क़ानून और न्याय तो कहीं है भी नहीं। मज़दूर अपने ही देश में पराये हो गए हैं। उन्हें धरने की जगह पर टैन्ट लगाने की अनुमति भी नहीं दी गई थी, वे इतनी गर्मी और धूप में बिना छाया के बैठे थे। क्या मज़दूर इन्सान नहीं हैं 45-48 डिग्री तापमान में उन्हें धूप में बैठने को मजबूर करना , क्या यह इन्सानियत का व्यवहार है? मज़दूर क्या देश के नागरिक नहीं हैं? क्या मज़दूर का जायज़ बात पर बोलने का हक़ नहीं बनता? हिरासत में लिये गए मज़दूरों में 30 महिला मज़दूर भी हैं।”
देशी विदेशी पूंजी के मालिक, उनकी सत्ता और सत्ता के खम्बे और मिडिया मिले हुए हैं, मजदुर वर्ग के शोषण के लिए, बेशी मूल्य बटोरने के लिए! मजदुर वर्ग एकताबढ क्यूँ नहीं हों? वर्गीय चेतना, एकता और संघर्ष के द्वारा ही सर्वहारा क्रांति संभव है, सर्वहारा सत्ता के लिए, शोषणविहीन समाज के लिए!
वर्गीय क्रांति ही वर्गविहीन समाज का आधार है!
No comments:
Post a Comment